सोमवार, 28 जून 2021

फ़र्द अश’आर 01

 1222---1222--1222--122


बढ़ाते हाथ अपने तो तुम्हें कैसे बढ़ाते 

हमारे हाथ बौने थे,अरे  वो भी कटे थे 

तुम्हें लगता रहा झूठा, दिखावा सब छलावा

समय के हाथ से  हम तो बहुत पहले लुटे थे

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1222----1222--1222----1222

तुम्हें क्या दे सकूँगा मैं सिवा इक प्यार, होली में 

प्रणय से है भरा उदगार, यही उपहार होली में 


भले ही भूल जाओ तुम, नहीं होगी शिकायत कुछ

करूँगा याद मैं तुमको ,सखे ! सौ बार होली  में 


तेरी तसवीर पर ही रंग भर कर मान लूँगा मैं 

मेरी चाहत हुई पूरी ,प्रिये ! इस बार  होली में 


-आनन्द.पाठक -

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