क़िस्त 83 ओके 1 अब क्या जीना तुम बिन ! आस यही मन में तुम आओगे इक दिन 2 खिंचता जाता मन है तेरी आँखों का कैसा आकर्षन है 3 पीड़ा अनजानी है एक सी ही लगती दोनों की कहानी है 4 कह दो जो कहना है वक़्त बहुत कम है कितने दिन रहना है 5 यह स्नेह का बन्धन है आप यहाँ आए स्वागत अभिनन्दन है -आनन्द.पाठक-
सुन्दर
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