गीत ग़ज़ल और माहिए ------
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मंगलवार, 21 अप्रैल 2026
अनुभूतियाँ 194/81
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अनुभूतियाँ 194/81 :1: एक बार जो आ जाओ तुम सुख दुख की बातें करनी है कुछ अपनी पीड़ा कहनी है और तुम्हारी कुछ सुननी है ।
सोमवार, 9 मार्च 2026
ग़ज़ल 466[40-जी] : मुक़ाबिल सच के होते ही---
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ग़ज़ल 466[40-जी] : मुक़ाबिल सच के होते ही--- 1222----12222---1222---122 मुक़ाबिल सच के होते ही वो घबराने लगे हैं । अगर मैं सच भी बोलूँ, उनको अफ़...
शुक्रवार, 27 फ़रवरी 2026
मुक्तक 023
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मुक्तक 023 :1: मन से मैने तुमको बस अपना माना है मैं हूँ तेरी ’राधा’ तू मेरा ’कान्हा’ है । :2: रंग अबीर गुलाल लगाए होली के हैं शुभ दिन आए भ...
गुरुवार, 19 फ़रवरी 2026
ग़ज़ल 465[39-जी] : ये भी कैसा निज़ाम है साहिब
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ग़ज़ल 465[39-जी] : ये भी कैसा निज़ाम है, साहिब ! 2122---1212--22 ये भी कैसा निज़ाम है , साहिब! इश्क़ का, दिल गुलाम है साहिब ! जिस्म बस नाम ही क...
रविवार, 15 फ़रवरी 2026
ग़ज़ल 464[38-जी] : लहज़े में लताफ़त है---
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ग़ज़ल 464[38-जी] : लहज़े में लताफ़त है--- 221---1222 // 221---1222 लहज़े है में लताफ़त है, पर दिल में कबाहत है मासूम से लगते वो, आँखों में शरारत...
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