गीत ग़ज़ल और माहिए ------
रिपोर्ताज
(यहां ले जाएं ...)
मुखपृष्ठ
अनुभूतियाँ
ग़ज़लें
कविताएँ
माहिए
गीत
रिपोर्ताज
दोहे
मुक्तक
विविध
▼
(यहां ले जाएं ...)
मुक्तक
विविध
▼
सोमवार, 8 जून 2026
दोहा 027 : सामान्य दोहे
›
:1: झूठे सारे आँकड़े, झूठी सारी बात टी0वी0 पर करता बहस, चीख रहा दिन रात :2:
गुरुवार, 4 जून 2026
कविता 034 : वही ढाक के तीन पात है
›
कविता 034: वही ढाक के तीन पात हैं । [03 जून 2026 , नई दिल्ली ,मालवीय नगर इलाके के एक होटल में आग लगी और 21-22 आदमी जल कर मर गए, कुछ झुलस ग...
बुधवार, 27 मई 2026
दोहे 026 : सामान्य दोहे
›
दोहे 026 : सामान्य दोहे :1: प्रेम रतन अनमोल है, यह दैविक उपहार । जो नर इसको पा लिया , तुच्छ लगे संसार ॥ :2: डोरी सदा पतंग की, और किसी के हा...
मंगलवार, 26 मई 2026
दोहे 25 : सामान्य दोहे
›
दोहे: क़िस्त 025 :1: हार कभी ना मानना, ना करना विश्राम । कष्ट मिटे, बंधन कटे, बोलो "जय श्री राम" ॥ :2: मंदिर मसजिद बाद मे, पहले मन ...
सोमवार, 25 मई 2026
दोहा 24: सामान्य दोहे
›
:1: अगर प्रेम से बोलिए, मैं जाऊँगा हार । ऐसे लोगों का करूँ, हाथ जोड़ सत्कार ।। :2: प्रवचन तो तू कर रहा , मगर कहीं है ध्यान । पहले मन तो साफ...
›
मुख्यपृष्ठ
वेब वर्शन देखें