गीत ग़ज़ल और माहिए ------
रिपोर्ताज
(यहां ले जाएं ...)
मुखपृष्ठ
अनुभूतियाँ
ग़ज़लें
कविताएँ
माहिए
गीत
रिपोर्ताज
दोहे
मुक्तक
विविध
▼
(यहां ले जाएं ...)
मुक्तक
विविध
▼
रविवार, 22 अगस्त 2010
एक ग़ज़ल 018 : न पर्दा उठेगा .....
›
फ़ेलुन---फ़ेलुन--फ़ेलुन--फ़ेलुन 122 -----122----122----122 बह्र-ए-मुतक़ारिब मुसम्मन सालिम ----------------- एक ग़ज़ल 018 ; न पर्दा उठेगा ...
2 टिप्पणियां:
शुक्रवार, 30 जुलाई 2010
एक ग़ज़ल 017 : चलो छोड़ देंगे .....
›
फ़ऊलुन---फ़ऊलुन--फ़ऊलुन--फ़ऊलुन 122----------122-------122-------122 बह्र-ए-मुतक़ारिब मुसम्मन सालिम -----------------------------------------...
शनिवार, 17 जुलाई 2010
ग़ज़ल 016 : तुम को खुदा कहा है .....
›
मफ़ऊलु---फ़ाइलातुन---// मफ़ऊलु----फ़ाइलातुन 221--------------2122 // 221-----------2122 बह्र-ए-मज़ारि’अ मुसम्मन अख़रब ----------------------...
1 टिप्पणी:
‹
›
मुख्यपृष्ठ
वेब वर्शन देखें