गीत ग़ज़ल और माहिए ------
रिपोर्ताज
(यहां ले जाएं ...)
मुखपृष्ठ
अनुभूतियाँ
ग़ज़लें
कविताएँ
माहिए
गीत
रिपोर्ताज
दोहे
मुक्तक
विविध
▼
(यहां ले जाएं ...)
मुक्तक
विविध
▼
बुधवार, 29 फ़रवरी 2012
गीत 037: मुझसे मेरे गीतों का ....
›
गीत 037 : मुझसे मेरे गीतों का ,प्रिय ! अर्थ न पूछो मुझसे मेरे गीतों का ,प्रिय ! अर्थ न पूछो कहाँ कहाँ से हमें मिलें हैं, दर्द न पूछो जब...
3 टिप्पणियां:
शुक्रवार, 24 फ़रवरी 2012
गीत 036 : दीन धरम -और- सच की बातें?
›
गीत 036 : दीन धरम औ’ सच की बातें ? किस युग की बातें करते हो? ’सतयुग’ बीते सदियाँ गुजरी, तुम जिसकी बातें करते हो . मैंने तो निश्छल समझा...
शुक्रवार, 17 फ़रवरी 2012
गीत 035: कर लो जितना पूजन अर्चन--...
›
गीत 035 कर लो जितना पूजन-अर्चन ,चाहे जितना पुष्प समर्पण मन का द्वार नहीं खुल पाया फिर क्या मथुरा,काबा,काशी कहने को तो अन्धकार में ,वह प्...
1 टिप्पणी:
‹
›
मुख्यपृष्ठ
वेब वर्शन देखें