गीत ग़ज़ल और माहिए ------
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रविवार, 12 अप्रैल 2015
चन्द माहिया : क़िस्त 019
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माहिए: क़िस्त 019 ओके :1: क्यों फ़िक़्र-ए-क़यामत हो हुस्न रहे ज़िन्दा और इश्क़ सलामत हो :2: ऐसे तो नहीं थे तुम तुम को मैं ढूँढू जाने न ...
मंगलवार, 7 अप्रैल 2015
एक ग़ज़ल 66 : दो दिल की दूरियों को....
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221--2121--1221--212 तू दूरियाँ दिलों की, मिटाने की बात कर अब हाथ दोस्ती का , बढ़ाने की बात कर तेरे वजूद के बिना मेरा वुजूद क्या ये...
रविवार, 5 अप्रैल 2015
एक ग़ज़ल 65 : फिर से नए चिराग़ जलाने की बात कर
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221--2121--1221---212 फिर से नये चिराग़ जलाने की बात कर सोने लगे है लोग ,जगाने की बात कर गुज़रेगा फिर यहीं से अभी कल का कारवां अन्दाज़-ए...
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