गीत ग़ज़ल और माहिए ------
रिपोर्ताज
(यहां ले जाएं ...)
मुखपृष्ठ
अनुभूतियाँ
ग़ज़लें
कविताएँ
माहिए
गीत
रिपोर्ताज
दोहे
मुक्तक
विविध
▼
(यहां ले जाएं ...)
मुक्तक
विविध
▼
शुक्रवार, 14 अक्टूबर 2016
एक ग़ज़ल 84[29] : जो जागे हैं.....
›
1222------1222------1222----1222 मफ़ाईलुन---मफ़ाईलुन---मफ़ाईलुन---मफ़ाईलुन बह्र-ए-हज़ज मुसम्मन सालिम ----------------------------- जो जाग...
बुधवार, 12 अक्टूबर 2016
एक ग़ज़ल 83[30] : नहीं उतरेगा अब कोई......
›
1222---1222----1222----122 मफ़ाईलुन---मफ़ाईलुन---मफ़ईलुन--फ़ऊलुन बह्र-ए-हज़ज मुसम्मन महज़ूफ़ --------------------------------------------------...
बुधवार, 21 सितंबर 2016
एक ग़ज़ल 82[27] : निक़ाब-ए-रुख़ में ...
›
1222---1222----1222-----1222 मफ़ाईलुन---मफ़ाईलुन---मफ़ाईलुन--मफ़ाईलुन बह्र-ए-हज़ज मुसम्मन सालिम ---------------------------- निक़ाब-ए-रु...
3 टिप्पणियां:
‹
›
मुख्यपृष्ठ
वेब वर्शन देखें