1 ग़म अपना ढो लेंगे पूछोगी जब तुम "अच्छा हूँ’-बोलेंगे 2 माना जख़्मी है दिल कैसे समझे तुम यह इश्क़ के नाक़ाबिल ? 3 कैसी ये शरारत है चिलमन में छुप कर करता वो इशारत है 4 जख़्मों को छुपा रखना कम तो नहीं ’आनन’ ग़म अपना दबा रखना 5 यह जादू किसका है ? उजड़े चमन में भी यह नूर जो छिटका है
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