अनुभूतियाँ 024 ओके 93 गुलशन गुलशन ख़ुशबू महके और हवाएँ हों आवारा , जितना जीना जी ले, प्यारे ! कब मिलता जीवन दोबारा ! 94 बोझ अगर है इन कंधों पर सिर्फ़ तेरे जाने का ग़म है वरना तो दिल बहलाने को यादें हैं, आँखें पुरनम है । 95 दान नहीं, सौगात नहीं यह खुद है सँवारा जीवन अपना, भला बुरा या चाहे जैसा मेरा जीवन, मधुवन अपना 96 उन बातों को दुहराना क्या घुमा-फिरा कर बात वही है, व्यर्थ बहस अब क्या करना है कौन ग़लत था, कौन सही है । x
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