अनुभूतियाँ : क़िस्त 038 ओके 149 इतने दिन तक तुम ने मुझको जाँचा-परखा, देखा होगा , कितना साथ निभा पायेगा दिल से अपने पूछा होगा । 150 मेरी हसरत, तेरी हसरत बीज प्यार का छुप छुप बोती, आगे तो अब रब की मरजी उल्फ़त होगी या ना होगी। 151 सूनेपन में दीवारों से बातें करती यादें सारी मैं कुछ कहता इससे पहले बोल उठी तसवीर तुम्हारी । 152 दिल का दरपन तोड़ गई तुम हुआ आइना टुकड़ा टुकड़ा चुन चुन कर बैठा हूँ कब से किसे सुनाऊँ अपना दुखड़ा । -आनन्द पाठक- x
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