अनुभूतियाँ : क़िस्त 063 ओके 249 इतना भी आसान नहीं है बरसों का यह साथ भुलाना, भूल भले ही जाओ तुम, पर मुझको तो ताउम्रनिभाना । 250 दिल की चिन्ता, कैसी चिन्ता ? रोना है तो, रो के रहेगा, टाल सका है कौन यहाँ कब होना है जो हो के रहेगा । 251 वक़्त गया फिर कब आता है यादें रह जाती हैं मन में, कागज की थी नाव कभी, पर बहुत भरोसा था बचपन में । 252 दुनिया ने हर बार छला है तुमने छला तो क्या कहते हम बात नई कोई तो नहीं यह यही लिखा था, क्या करते हम x
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