129/16 513 अगम व्यथाओं का होता है एक समन्दर सब के अन्दर कश्ती पार लगेगी कैसे जूझा करते हैं जीवन भर 514 ग़लत बयानी करते रहना ख़ुद ही उलटे शोर मचाना नया चलन हो गया आजकल सच की बातों को झुठलाना 515 पंडित जी ने बतलाया था शर्त तुम्हारी पता तुम्हारा पाप-पुण्य की ही गणना में बीत गया यह जीवन सारा 516 सबकी अपनी व्यथा-कथा है अपने अपने विरह मिलन की सब के आँसू एक रंग के मौन कथाएँ पीर नयन की -आनन्द.पाठक- x
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