617 सात जनम की बातें करते सुनते रहते वचन धरम में एक जनम ही निभ जाए तो बहुत बड़ी है बात स्वयं में । 618 बंद अगर आँखें कर लोगी फिर कैसे दुनिया देखोगी कौन तुम्हारा, कौन पराया लोगों को कैसे समझोगी । 619 सरल नही है सच पर टिकना पग पग पर है फिसलन काई मिल कर टाँग खीचने वाले झूठों के जो है अनुयायी । 620 यह दुनिया है, बिना सुने ही ठहरा देगी तुमको मजरिम लाख सफाई देते रहना वही फैसला उसका अंतिम -आनन्द पाठक- x
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