गीत ग़ज़ल और माहिए ------
रिपोर्ताज
(यहां ले जाएं ...)
मुखपृष्ठ
अनुभूतियाँ
ग़ज़लें
कविताएँ
माहिए
गीत
रिपोर्ताज
दोहे
मुक्तक
विविध
▼
(यहां ले जाएं ...)
मुक्तक
विविध
▼
गुरुवार, 14 अगस्त 2025
चंद माहिए 111/21
चन्द माहिए : क़िस्त 111/21
:1:
उस पार मेरा माही
टेरेगा जिस दिन
उस दिन तो जाना ही ।
:2:
जब दिल ही नहीं माना
क्या होगा लिख कर
कोई राजीनामा ।
:3:
बच्चे तो गर उड़ कर
अब तो बस हम तुम
तनहाई , सूना घर ।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
‹
›
मुख्यपृष्ठ
वेब वर्शन देखें
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें