अनुभूतियाँ 056 ओके 221 आशा की बस एक किरन भी काफी होती अन्धकार में, हिम्मत भी आ जाती है फिर बैठी रहती इन्तज़ार में । 222 ख़बर सुनी जो इधर उधर से वही मुझे तुम सुना रही हो मेरी आँखों से पढ़ लेती- ग़लत-सलत सब बता रही हो 223 इसी हवा से बुझते दीपक इसी हवा से फैले ख़ुशबू, प्यार की बातें करने वाले नफ़रत वाली करें गुफ़्तगू । 224 क़दम क़दम पर दुनिया वाले अटकाते रहते हैं रोड़े, इस से तो हैं तारे बेहतर तारीक़ी में साथ न छोड़े । x
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