अनुभूतियाँ 055 ओके 217 तुमसे पहले भी दुनिया थी बाद तुम्हारे भी यह होगी इक दिन सबको जाना होगा चाहे भोगी हो या जोगी 218 नया सफ़र हो तुम्हे मुबारक साथी तुमको मिला नया है , जितना साथ रही तुम, काफी आभारी हूँ, शिकवा क्या है ! 219 सौ बातों की एक बात है बीत गई जो अब जाने दो, नई हवाएँ चन्दन वन से आती हैं तो अब आने दो । 220 तेरा ख़ुद का चेहरा था वह देखा जो तूने दरपन में , चौंक गई क्यों? ख़ौफ़जदा क्यों? अक्स वही था जो था मन में । x
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