रिपोर्ताज

बुधवार, 27 मई 2026

दोहे 026 : सामान्य दोहे

 दोहे 026 : सामान्य दोहे

:1:

प्रेम रतन अनमोल है, यह दैविक उपहार ।

जो नर इसको पा लिया , तुच्छ लगे संसार ॥

:2:

डोरी सदा पतंग की, और किसी के हाथ ।

चाहे उसको जो कहें, ’स्वामी’ ख़ालिक़’ नाथ।

:3:

कौन यहाँ ठहरा कभी , नियत समय के बाद ।

जब तक चलती साँस है , तब तक हैं आबाद ।।

:4:

मरा हुआ वह आदमी जिसका मरा जमीर ।

क्या उससे आशा करें क्या समझे वह पीर ।।

:5:

सच्चा गुरुवर है वही, देवै सच्चा ग्यान ।
जो माया में लिप्त हो,  ढोंगी उसको जान ॥

:6:

दिखता तो मासूम है, बनता है अनजान

लेकिन बैठा घात में, लेकर तीर-कमान ।

:7:

 सर इतना भी ना झुका, टोपी ही गिर जाए ।

और राजदरबार में , स्वाभिमान मर  जाय ॥


-आनन्द.पाठक ’आनन’-

8800927181




कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें