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मंगलवार, 26 मई 2026

दोहे 25 : सामान्य दोहे

दोहे: क़िस्त 025

:1:
हार कभी ना मानना, ना करना विश्राम ।
कष्ट मिटे, बंधन कटे, बोलो "जय श्री राम" ॥

:2:
मंदिर मसजिद बाद मे, पहले मन की मान ।
मन के अंदर झाँक तो, खुद को तू पहचान ॥

:3:
मिल जाएँगी मंजिले, मन मे हो गर चाह ।
दुखी विकल मत हो सखे!, जीने की सौ राह ॥

:5:
कह 'आनन' क्यो कर रहा, आदर्शों की बात ।
सभी यहाँ तैयार हैं , करने को आघात ॥

:6:
कथनी करनी में दिखे, तुम्हे किसी में फ़र्क ।
नहीं  भरोसेमंद  वह ,जो  भी देवे  तर्क ॥

:7:
ऊपर से वह दिखा रहा , भले मधुर मुसकान ।
लेकिन भीतर हँस रहा , एक कुटिल  शैतान  ॥

-आनन्द.पाठक ’आनन’

880092 7181

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