1222---1222--1222---1222
मुफ़ाईलुन--मुफ़ाईलुन--मुफ़ाईलुन--मुफ़ाईलुन
बह्र-ए-हज़ज मुसम्मन सालिम
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भरेगा चाबियाँ उतनी तू जितना नाच पाएगा ।
ग़ज़ल 269 / 34 E
212---212---212---212
-आनन्द पाठक -
अनुभूतियाँ : क़िस्त 025 ओके
ग़ज़ल 268(33E)
1212--1122---1212--22
शब्दार्थ
दयार-ए-यार से = यार के इलाके से
रस्म-ओ-राह = ढंग तरीक़ा
अक़ीदा = श्रद्धा विश्वास
राबिता = सम्पर्क
अज़ाब = यातना कष्ट
ग़ज़ल 267 [32E]
ग़ज़ल 267
122---122---122--122
-आनन्द.पाठक-
शब्दार्थ
अना = अहं
सदाक़त = सच्चाई
ग़ज़ल 266 [31 E ]
221---2121---1221---212
-आनन्द पाठक-
शब्दार्थ
अना = अहं. अहंकार
मोजिज़ा = चमत्कार
ग़ज़ल 265(30E)
2122---2122--212
-आनन्द.पाठक-
शब्दार्थ
हक़बयानी - सच्ची बात
ग़ज़ल 264 [29 E]
2122---1212---22
-आनन्द.पाठक-
दर्द-ए-पारीन = पुराना दर्द
ग़ज़ल 263 [28E]
2122--1212--112/22
-आनन्द.पाठक-
शब्दार्थ
शिफ़ाख़ाना = अस्पताल. चिकित्सालय
ग़ज़ल 262 [27 E]
122---122---122---122
-आनन्द.पाठक-
मरासिम = संबंध ,Relations
ग़ज़ल 260 [25 इ]
221--1222--//221--1222
ग़ज़ल 259 [24 E]
2122---2122---2122
-आनन्द पाठक-
शब्दार्थ
ज़ाहिद = धर्मोपदेशक
सादिक़ = सच्च न्यायनिष्ठ
तर्बियत- अख़्लाक़ = संस्कार शिष्ट आचार
ग़ज़ल 258 [23E]
221---2122 // 221--2122
-आनन्द.पाठक-
शब्दार्थ
इज़्तराब-ए-दिल = दिल की बेचैनी/व्याकुलता
बाहमी रिश्ता = परस्पर आपसी रिश्ता
जाविदा = शाश्वत ,नित्य , अमर
हिर्स-ओ-हवस,अना से = लोभ मोह वासना अहम घमण्ड से
बेलौस साफ़ = पाक बेदाग़ साफ़