गुरुवार, 14 मई 2026

दोहा 23:सामान्य दोहे

:1:
इधर उधर की बात कर, भरमाता है रोज
झूठे झूठे आँकड़े,  लाता है वह  खोज ।।

:2:
पहले मन निर्मल करो, निर्मल करो सुभाय
तब मंदिर के द्वार पर , झुक कर शीश नवाय

:3:
अपनी डफली पीटता, बसअपना ही राग
औरों के हर काम में, ढूँढे सौ सौ दाग ।

:4:
जो नर जीता अहम में. रहिए उससे दूर
क्या समझेगा आप को, वह है मद में चूर ।

:5:
जो कुर्सी के लोभ में, बेच दिया ईमान
कभी भरोसा ना करें, वह हल्का इंसान ।  

:6:
चाल चले दुरजन कुटिल, उसका अपना ढंग
मिलता रहता सुख उसे, करे रंग में भंग ।

:7:
मधुरिम वाणी बोलता, मन लेता है जीत
धोखा देगा एक दिन, उसकी है यह रीत

-आनन्द पाठक 'आनन'-

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