दोहे 026 : सामान्य दोहे
:1:
प्रेम रतन अनमोल है, यह दैविक उपहार ।
जो नर इसको पा लिया , तुच्छ लगे संसार ॥
:2:
डोरी सदा पतंग की, और किसी के हाथ ।
चाहे उसको जो कहें, ’स्वामी’ ख़ालिक़’ नाथ।
:3:
कौन यहाँ ठहरा कभी , नियत समय के बाद ।
जब तक चलती साँस है , तब तक हैं आबाद ।।
:4:
मरा हुआ वह आदमी जिसका मरा जमीर ।
क्या उससे आशा करें क्या समझे वह पीर ।।