झूठे सारे आँकड़े, झूठी सारी बात
टी0वी0 पर करता बहस, चीख रहा दिन रात
:2:
दोहे 026 : सामान्य दोहे
:1:
प्रेम रतन अनमोल है, यह दैविक उपहार ।
जो नर इसको पा लिया , तुच्छ लगे संसार ॥
:2:
डोरी सदा पतंग की, और किसी के हाथ ।
चाहे उसको जो कहें, ’स्वामी’ ख़ालिक़’ नाथ।
:3:
कौन यहाँ ठहरा कभी , नियत समय के बाद ।
जब तक चलती साँस है , तब तक हैं आबाद ।।
:4:
मरा हुआ वह आदमी जिसका मरा जमीर ।
क्या उससे आशा करें क्या समझे वह पीर ।।
:5:
सच्चा गुरुवर है वही, देवै सच्चा ग्यान ।
जो माया में लिप्त हो, ढोंगी उसको जान ॥
:6:
दिखता तो मासूम है, बनता है अनजान
लेकिन बैठा घात में, लेकर तीर-कमान ।
:7:
सर इतना भी ना झुका, टोपी ही गिर जाए ।
और राजदरबार में , स्वाभिमान मर जाय ॥
-आनन्द.पाठक ’आनन’-
8800927181