त्रिपदी 003
:1:
ढूँढ रहा है जिसको प्राणी
मंदिर,मसजिद ,गिरजाघर में
वो तेरे मन के अन्दर में ।
:2:
ये बस कहने भर की बातें
प्रेम हमारा नभ से ऊँचा
और समंदर से भी गहरा ।
प्रेम हमारा नभ से ऊँचा
और समंदर से भी गहरा ।
:3:
वह झूठ सदा बोला करता
क्या कोई आस करे उस पर
कैसे विश्वास करे उस पर ।
:4:
एकोऽहम् में डूबा है वह
खुद से आगे क्या सोचेगा
बंद आँख है क्या देखेगा ।