मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

त्रिपदी 002

 त्रिपदी 002

;1:
जगत चराचर के स्वामी तुम
मम अपराध क्षमा करना, प्रभु !
मुझ पर सदा दया करना, प्रभु !

:2:
जीवन सफल उसी का जिसने
सीख लिया हो क्या होता बस
मौन समर्पण, प्रेम सुधा-रस ।

:3:
साध्य सदा रहता है मन में
साधक का जब मन पावन हो
तब ही प्रभु का शुभ दर्शन हो ।

:4;
अमर प्रेम तुम तब समझोगी
डूबोगी तुम जब गहराई में
सोचोगी जब तनहाई में ।

:5:
प्रवचन सुन कर ही क्या होगा
पाप-पुण्य तो तब तोलोगे
द्वार हृदय का जब खोलोगे।


-आनन्द.पाठक ’आनन’-

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अमर प्रेम तुम तब समझोगी

रविवार, 20 सितंबर 2026

फ़र्द अश’आर

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फ़र्द अश’आर 

:1:

221--2121---1221---212

चेहरे पे यह निक़ाब किसी काम का नहीं

सूरत तिरी बसी हुई मेरी  निगाह में ।

शनिवार, 12 सितंबर 2026

त्रिपदी 001

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त्रिपदी  001

:1:
प्यार मुहब्बत इश्क़ वफ़ा सब
सुनने  में लगता है अच्छा
कहाँ कभी मिलता है सच्चा ।

:2:
अपना दुख अपने सहने की
ढोने की सबकी लाचारी
बाक़ी तो सब दुनियादारी  

:3;
जब तुमको सुनना ही नहीं कुछ
दर्द सुना कर फिर क्या होगा
जख्म दिखा कर फिर क्या होगा

4
सबकी अपनी राह अलग है
सबकी अपनी अपनी मंजिल
बातिल हो या चाहे आदिल

5
संकेतों मे नही समझना
कैसे तुमको समझाऊँ मै
कैसे तुमको बतलाऊँ मैं


-आनन्द.पाठक ’आनन’-

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