इधर उधर की बात कर, भरमाता है रोज
झूठे झूठे आँकड़े, लाता है वह खोज ।।
:2:
पहले मन निर्मल करो, निर्मल करो सुभाय
तब मंदिर के द्वार पर , झुक कर शीश नवाय
:3:
अपनी डफली पीटता, बस अपना ही राग
औरों के हर काम में, ढूँढे सौ सौ दाग ।
अनुभूतियाँ 194/81
:1:
एक बार जो आ जाओ तुम
सुख दुख की बातें करनी है
कुछ अपनी पीड़ा कहनी है
और तुम्हारी कुछ सुननी है ।