गुरुवार, 16 सितंबर 2021

एक कविता : कितना आसान होता है

 

-कविता-

कितना आसान होता है

किसी पर कीचड़ ऊछालना

किसी पर उँगली उठाना

कितना आसान होता है

किसी लाइन को छोटा करना

मासूम परिन्दों पर निशाना लगाना

अच्छा लगता, तुष्टि अहम का

अपने को कुछ बड़ा दिखाना।


 गुलाब बन कर कहीं खिले होते

जनाब ! हँस कर कभी मिले होते

किसी की आँख के आँसू बन बहे होते

पता चलता

यह भी ख़ुदा की बन्दगी है

क्या चीज़ होती ज़िन्दगी है ।


-आनन्द.पाठक-  

शनिवार, 11 सितंबर 2021

अनुभूतियाँ : क़िस्त 11

 

क़िस्त 11

 

1

दो बरतन जब पास पास हों

लाजिम उनका टकराना है।

छोड़ो छॊटी-मोटी बातें -

बोलो वापस कब आना है ?

 

2

दशकों का था साथ पुराना,

चाँदी से तुम मोल लगाए ।

सत्य यही है अगर तुम्हारा

तो फिर कौन तुम्हें समझाए?

 

3

चाँद सितारों वाली बातें,

लिख्खी हुई किताबों में हैं।

चाँद तोड़ कर लाने वाली

बातें केवल बातॊं में हैं ।

 

4

एक नहीं मैं ही दुनिया में

जिसकी कोई व्यथा पुरानी ।

एक नहीं. दो नहीं, हज़ारों

मेरी जैसी  विरह कहानी ।

 

-आनन्द.पाठक-

 

गुरुवार, 9 सितंबर 2021

मेरी किताब : सुन मेरे माही !- का प्रकाशन


 

 एक सूचना =  पुस्तक प्रकाशन के सन्दर्भ में

मित्रो !

सूचित करते हुए हर्ष की अनुभूति हो रही है  कि आप लोगों के आशीर्वाद और शुभकामनाओं से मेरी सातवीं  पुस्तक -" सुन, मेरे माही ! "- [ माहिया- संग्रह ] प्रकाशित हो कर आ गई ।

इस से पूर्व मेरी -6-पुस्तकें [ 3- कविता/ग़ज़ल/गीत संग्रह और 3- हास्य व्यंग्य़ संग्रह] प्रकाशित हो चुकी हैं । इन सभी पुस्तकों का प्रकाशन "अयन प्रकाशन, नई दिल्ली " ने किया है ।

"अयन-प्रकाशन’ को इस हेतु बहुत बहुत धन्यवाद।

 

इस संग्रह में मेरी 450 माहिए संकलित है जिसमे से कुछ माहिए आप लोगो ने इस मंच पर समय समय पर अवश्य पढ़ी होंगी ।

इस संग्रह में मैने माहिए के उदभव, विकास और माहिए के वज़न और बह्र के बारे में भी चर्चा की है।

आशा करता हूँ कि इस संग्रह को भी पूर्व की भाँति आप सभी लोगो का स्नेह और आशीर्वाद मिलता रहेगा।

 

पुस्तक प्राप्ति के लिए अयन प्रकाशन से सम्पर्क किया जा सकता है । उनका पता है संलग्न है ।

whatsapp no = 92113 12372 [ संजय जी ]

{नोट : प्रकाशक यह पुस्तक शीघ्र ही Amazon पर उपलब्ध करा देगा ]

 

पुस्तक मिलने का पता –

 अयन प्रकाशन

1/20 महरौली, नई दिल्ली 110 030


शाखा—जे-19/39 राजापुरी. उत्तम नगर , नई दिल्ली-59

Email : ayanprakashan@gmail.com

Website : www.ayanprakashan.com

 

   -सादर-

-आनन्द.पाठक-

 

शनिवार, 21 अगस्त 2021

अनुभूतियाँ : क़िस्त 10

 अनुभूतियाँ : क़िस्त 10

1

इतना साथ निभाया तुमने

चन्द बरस कुछ और निभाते ।

कौन यहाँ पर अजर-अमर है ,

साँस आख़िरी तक रुक जाते ।


 2

सब माया है, सब धोखा है, 

ज्ञानीजन ने कहा सही है।

फिर भी मन है बँध-बँध जाता 

दुनिया का दस्तूर यही है ।


3

अपनी अपनी लक्ष्मण रेखा,

सबकी अपनी सीमाएँ हैं ।

घात लगाए बैठी  दुनिया ,

पाप पुण्य की दुविधाएँ हैं ।


 4

नोक-झोंक तो चलती रहती ,

उल्फ़त की यह अदा पुरानी ।

बात बात में रूठ के जाना

गहन प्रेम की यही निशानी ।


-आनन्द.पाठक-


रविवार, 15 अगस्त 2021

ग़जल 193 : आप महफ़िल में जब भी आते हैं

 2122---1212---112/22

ग़ज़ल 193

आप महफ़िल में जब भी आते हैं
साथ अपनी अना  भी लाते  हैं ।


चाँद तारों की बात तुम जानो
बात धरती की हम सुनाते हैं


जब भी आता चुनाव का मौसम
ख़्वाब क्या क्या न वो दिखाते हैं


वक़्त सबका हिसाब करता है
लोग क्यों ये समझ न पाते हैं


बेसबब बात वो नहीं करते
बेगरज़ हाथ कब मिलाते हैं 


अब परिन्दे न लौट कर आते 
गाँव अपना जो छोड़ जाते हैं


इस जहाँ की यही रवायत है
लोग आते हैं ,लोग जाते हैं


तुम भी क्यों ग़मजदा हुए ’आनन’
लोग रिश्ते न जब निभाते हैं


-आनन्द पाठक-

अना    = अहंकार ,घमंड