मंगलवार, 10 फ़रवरी 2026

अनुभूतिया 179:

 अनुभूतियाँ 

:1:
अपना ग़म तो अपना ग़म है
जिसको जीवन भर ढोना है
कौन यहाँ किसकी सुनता है
दुनिया भर से क्या रोना है ।

:2:
एक नशा मयखाने वाला
एक नशा है धन दौलत का
वो जो हवा में उड़ते रहते
जीते जीवन है गफ़लत का ।

:3:
जैसा चाहूँ वैसा तो यह
मिला नहीं करता है जीवन’
कभी मिला करता है मरुथल
कभी मिला करता है मधुबन ।

:4:
रंग मंच पर कठपुतली सा
कौन नचाता है जीवन भर
और हमें भ्रम रहा  हमेशा
हम हैं इस दुनिया से ऊपर।

-आनन्द पाठक ’आनन’
880092 7181

गुरुवार, 5 फ़रवरी 2026

कविता 033 : एक आदमी क़लम घिसता है --

  स्व0] कवि धूमिल जी की प्रेरणा से,  क्षमा याचना सहित ]---

एक आदमी 
क़लम घिसता है ।
एक आदमी कवि मंच की
गणेश परिक्रमा करता है 
एक तीसरा आदमी भी है
जो न क़लम घिसता है, 
न आयोजकों की परिक्रमा करता है ।
वह जुगाड भिड़ाता है
जुगाड़ करता है 
और पुरस्कार बटोरता है।
मैं पूछता हूँ 
"यह तीसरा आदमी कौन है"
साहित्य सभा इस प्रश्न पर मौन है ।

-आनन्द पाठक ’आनन’-



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आ0 [स्व0] धूमिल जी की मूल कविता पाठको के अवलोकनार्थ यहाँ लगा रहा हूँ
आप भी आनन्द उठाएँ

एक आदमी
रोटी बेलता है
एक आदमी रोटी खाता है
एक तीसरा आदमी भी है
जो न रोटी बेलता है, न रोटी खाता है
वह सिर्फ़ रोटी से खेलता है
मैं पूछता हूँ--
'यह तीसरा आदमी कौन है ?'
मेरे देश की संसद मौन है।

--धूमिल -

मंगलवार, 3 फ़रवरी 2026

ग़ज़ल 463[37-जी] :तुम मेरी इयादत क्या करते

 ग़ज़ल 463[37-जी] : तुम मेरी इयादत क्या करते

221---1222---112/22

बह्र-ए-हज़ज मुसद्दसअख़रब अब्तर

तुम मेरी इयादत क्या करते
बातिल हो, इनायत क्या करते

सुनना ही नहीं है जब तुमको
हम तुमको नसीहत क्या करते ।

माना कि हमारे तुम न हुए
दुनिया से शिकायत क्या करते

अपने न हुए जो अपने थे 
ग़ैरों की हिमायत क्या करते

हर  शै में तुम्हारा अक्स निहाँ
हम शौक़-ए-जियारत क्या करते

यह हुस्न तुम्हारा लासानी
हम इसकी क़िताबत क्या करते।

’आनन’ को नहीं समझा तुम ने
हम और वज़ाहत क्या करते ।

-आनन्द पाठक ’आनन’-

बातिल हो = झूठे हो
इयादत   = हाल चाल पूछना
इनायत = मेहरबानी ,कृपा
लासानी = अद्वितीय , अनुपम
वज़ाहत = स्पष्टीकरण