माहिए: क़िस्त 025 ओके
1
टूटा जो खिलौना है
ये तो होना था
किस बात का रोना है ?
2
नाशाद है खिल कर भी
प्यासी है नदिया
सागर से मिल कर भी
3कुछ दर्द दबा रखनामोती-से आँसूपलकों में छुपा रखना 4इतना तो बता देतेक्या थी ख़ता मेरी ?फिर जो भी सज़ा देते 5बस हाथ मिलाते होएक छलावा सारिश्ता न निभाते हो
-आनन्द पाठक ’आनन’
8800927181-
3
कुछ दर्द दबा रखना
मोती-से आँसू
पलकों में छुपा रखना
4
इतना तो बता देते
क्या थी ख़ता मेरी ?
फिर जो भी सज़ा देते
5
बस हाथ मिलाते हो
एक छलावा सा
रिश्ता न निभाते हो
-आनन्द पाठक ’आनन’
8800927181-