शुक्रवार, 10 जुलाई 2026

चंद माहिए 111/21 :

 चन्द माहिए  111/21 [ नोंक-झोंक के]

:1:

तुम चाँद से भी सुंदर

झील सी हैं आँखें

तुमसे न कोई बेहतर 

:2:

मस्का न लगाओ जी

पहले घर जा कर

मुँह धोकर आओ जी 

:3:

मुझसे भी कभी जुड़ कर

दिल सच्चा मेरा

देखो तो ज़रा मुड़ कर

:4:

बनते हो दिलवाले

जान रहीं हूँ मैं

तुम हो दिल के काले

:5:

मैं चाँद भी ला दूँगा

और सितारे भी

जुल्फ़ों में सजा दूँगा

:6:

हट ! सोच बड़ी सस्ती

दाँत नहीं मुँह में

करने को चला मस्ती

:7:

बेबात का रगड़ा क्यों ?

हम तुम जब राजी

फिर व्यर्थ का झगड़ा क्यॊ ?

:8:

अच्छा जी, मियाँ, मजनू !

पिचके गालों पर

कितना है गुमाँ, मजनू !


-आनन्द पाठक”आनन’
8800927181