सोमवार, 8 जुलाई 2024

दोहा 18 : सामान्य

 ्दोहा 18 [ सामान्य]


नकली बाबा बोलता, खुद को ’हरि-अवतार’ ।
जनता भी पागल हुई, जाने को दरबार ॥

शुहरत उसको क्या मिली, बदल गया व्यवहार ।
हेय समझने लग गया , जो थे उसके यार ॥

जीवन इक लम्बा सफर, मिले किसी का साथ ।
कट जाए आराम से, जुड़े हाथ से हाथ ।।

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