कविता 001
आप क्यों उदास रहते हैं ?
अतीत की कोई
अनकही व्यथा, दर्द
आंखों में उतर आता है ?
नीरव आंखो की दो-बूंद
सागर की अतल गहराइयों से
कहीं ज्यादा गहरी
कहीं ज्यादा अगम्य हो जाती है ?
अतीत की कोई
अनकही व्यथा, दर्द
आंखों में उतर आता है ?
नीरव आंखो की दो-बूंद
सागर की अतल गहराइयों से
कहीं ज्यादा गहरी
कहीं ज्यादा अगम्य हो जाती है ?
आप के अंतस का दावानल
सूर्य की तपती किरणों से
कहीं ज्यादा तप्त व दग्ध हो जाता है ?
सूर्य की तपती किरणों से
कहीं ज्यादा तप्त व दग्ध हो जाता है ?
उदासी की यह चादर फेंक दे अनंत में
और देखें अनागत वसंत
लहरों का उन्मुक्त प्रवाह
जिन्दगी की सुगंध
जो आप के आस-पास रहती हैं ।
कुछ कहती हैं
कि आप क्यों उदास रहते हैं ?
आप क्यों उदास रहते हैं ?
-आनन्द.पाठक ’आनन’-
कि आप क्यों उदास रहते हैं ?
आप क्यों उदास रहते हैं ?
-आनन्द.पाठक ’आनन’-
8800927181
इस गीत को मेरे यू-ट्यूब्चनेल चैनेल आवाज़ का सफ़र में सुने--
इस कविता का [ संशोधित रूप] आप यहाँ भी सुन सकते हैं--
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