कविता 023 [ आ0 धूमिल जी की एक कविता की प्रेरणा से]
एक देश लड़ता है
दूसरा देश विरोध में लड़ता है ।
एक तीसरा देश भी है
जो न लड़ता है, अपितु लड़ाता है ।
अपना हथियार बेच
मोटा मुनाफ़ा कमाता है।
मैं पूछता हूँ
वह तीसरा देश कौन है
इस विषय पर U.N.O मौन है।
-आनन्द.पाठक-
आ0 [स्व0] धूमिल जी की मूल कविता पाठको के अवलोकनार्थ यहाँ लगा रहा हूँ
आप भी आनन्द उठाएँ
एक आदमी
रोटी बेलता है
एक आदमी रोटी खाता है
एक तीसरा आदमी भी है
जो न रोटी बेलता है, न रोटी खाता है
वह सिर्फ़ रोटी से खेलता है
मैं पूछता हूँ--
'यह तीसरा आदमी कौन है ?'
मेरे देश की संसद मौन है।
आप भी आनन्द उठाएँ
एक आदमी
रोटी बेलता है
एक आदमी रोटी खाता है
एक तीसरा आदमी भी है
जो न रोटी बेलता है, न रोटी खाता है
वह सिर्फ़ रोटी से खेलता है
मैं पूछता हूँ--
'यह तीसरा आदमी कौन है ?'
मेरे देश की संसद मौन है।
--धूमिल -
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