गुरुवार, 5 फ़रवरी 2026

कविता 033 : एक आदमी क़लम घिसता है --

  स्व0] कवि धूमिल जी की प्रेरणा से,  क्षमा याचना सहित ]---

एक आदमी 
क़लम घिसता है ।
एक आदमी कवि मंच की
गणेश परिक्रमा करता है 
एक तीसरा आदमी भी है
जो न क़लम घिसता है, 
न आयोजकों की परिक्रमा करता है ।
वह जुगाड भिड़ाता है
जुगाड़ करता है 
और पुरस्कार बटोरता है।
मैं पूछता हूँ 
"यह तीसरा आदमी कौन है"
साहित्य सभा इस प्रश्न पर मौन है ।

-आनन्द पाठक ’आनन’-



======   =======  ===

आ0 [स्व0] धूमिल जी की मूल कविता पाठको के अवलोकनार्थ यहाँ लगा रहा हूँ
आप भी आनन्द उठाएँ

एक आदमी
रोटी बेलता है
एक आदमी रोटी खाता है
एक तीसरा आदमी भी है
जो न रोटी बेलता है, न रोटी खाता है
वह सिर्फ़ रोटी से खेलता है
मैं पूछता हूँ--
'यह तीसरा आदमी कौन है ?'
मेरे देश की संसद मौन है।

--धूमिल -

कोई टिप्पणी नहीं: