अनुभूतियाँ 193/80
:1:
बात अगर लग जाती दिल को
चुभ जाती है दिल के अंदर
लाख भुलाना चाहो, लेकिन
लाख भुलाना चाहो, लेकिन
फ़ाँस बनी रहती जीवन भर ।
:2:
जीवन क्या है ? एक छलावा
सब धोखा है, सब माया है।
छोड़ गया जो इस दुनिया को
कौन लौट कर फिर आया है ।
:3:
सत्य नहीं तुम पहचानोगे
जब तक 'अहम' तुम्हारे अंदर
चंदन टीका कंठी माला
भगवा तबतक है आडंबर ।
:4:
कितनी बार लड़े झगड़े हम
कितनी बार मनाया हमने
इक अटूट बंधन है ऐसा
हर दिन प्रीति निभाया हमने
-आनन्द पाठक ’आनन’-
880092 7181
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