त्रिपदी 01
:1:
प्यार मुहब्बत इश्क़ वफ़ा सब
सुनने में लगता है अच्छा
कहाँ कभी मिलता है सच्चा ।
:2:
अपना दुख अपने सहने की
ढोने की सबकी लाचारी
बाक़ी तो सब दुनियादारी
-आनन्द.पाठक ’आनन’-