अनुभूतियाँ 186/73
:741:
अर्ज़ किया है मैने तुमसे
चाहे मानो या ना मानो
कौन है अपना, कौन पराया
कम से कम इतना पहचानो ।
742:
प्रेम हमेशा रद कर देता
मतलब,स्वार्थ,ग़रज़, प्रत्याशा
प्रेम सदा समझा करता है
प्रेम समर्पण वाली भाषा ।
743
शब्द जहाँ पर चुप हो जाते
पीड़ा को बतलाने में जब
आँखें सूनी सूनी रहती -
मौन मुखर हो जाता है तब।
744
कितने रूप ज़िंदगी तेरे
कितने मोड़ अभी राहों में
जीन है तो चलना होगा
कड़ी धूप में या छावों में ।
जीन है तो चलना होगा
कड़ी धूप में या छावों में ।
-आनन्द पाठक ’आनन’
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