अनुभूतियाँ 191/78
दिल से जब दिल बातें करता
फिर काहे की पर्दादारी ।
दुनिया वाले किया करेंगे
दिल पर कब तक पहरेदारी।
:2:
मेरी सीधी सच्ची बातें
क्यों लगती हैं तुमको झूठी
ग़ैरों की बातों में आकर
क्यों रहती हो रूठी रूठी ।
:3:
वादे तो सब ही करते हैं
साथ निभाने का जीवन भर
मतलब जब पूरा हो जाता
नहीं देखते वो फिर मुड़ कर।
:4:
छोड़ो ! क्या करना है तुमको
सुन कर मेरी राम कहानी ।
जैसी सब की, वैसी मेरी
मिलन, विरह, आँखों मे पानी।
-आनन-
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