जिधर चलाता, उधर ही चलते,
पहले से जो लिखा हुआ है
भाग्य-लेख कब, कहाँ बदलते ।
इन बातों का क्या मतलब है ,
जो होना था हो ही गया वह
क्या करना इस दिल का अब है।
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मन पर अपने बोझ न रखना,
काम नियति का यह भी होता
समय समय पर हमें परखना
लाख जतन जितना भी कर लो,
मुठ्ठी खाली ही रहनी है
जीवन भर तुम जितना भर लो
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