शुक्रवार, 6 जनवरी 2023

अनुभूतियाँ : क़िस्त 049

अनुभूतियाँ 049 ओके 
193
ध्यान हमेशा अपना रखना
मैं न रहूँगी जब जीवन में,
साँस साँस बन घुली रहूँगी
साथ तुम्हारे हर चिन्तन में ।
 
194
कौन रखेगा ध्यान तुम्हारा
खुद से लापरवाह बहुत हो ,
दुनिया भर के ग़म ढोने की
रखते हो तुम चाह बहुत हो ।
 
195
मन दीवाना भटक रहा है
साध सको तो साध लो इसको,
अपनी वेणी के गजरे से
बाँध सको तो बाँध लो इसको ।
 
196
कैसी जादूगरी तुम्हारी
गायब भी हो, हाज़िर भी हो,
कैसी है यह अदा तुम्हारी
 छुपी हुई हो ज़ाहिर भी हो । 

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