शुक्रवार, 18 मई 2018

चन्द माहिया : क़िस्त 43

चन्द माहिया : क़िस्त 43


         :1:
हर साँस अमानत है
जितनी है उतनी
उसकी ही इनायत है

:2:
उन को सब की है ख़बर
कौन छुपा उन से
सब उनकी ज़ेर-ए-नज़र

:3:
कब मैने सोचा था
टूट गया वो भी
तुम पे जो भरोसा था

:4:
इतना जो मिटाया है
और मिटा देते
दम लब तक आया है

:5:
आँखों में शरमाना
कुछ तो है दिल में
 रह रह कर घबराना

-आनन्द.पाठक-
[सं 15-06-18]

1 टिप्पणी:

'एकलव्य' ने कहा…

निमंत्रण

विशेष : 'सोमवार' २१ मई २०१८ को 'लोकतंत्र' संवाद मंच अपने साप्ताहिक सोमवारीय अंक के लेखक परिचय श्रृंखला में आपका परिचय आदरणीय गोपेश मोहन जैसवाल जी से करवाने जा रहा है। अतः 'लोकतंत्र' संवाद मंच आप सभी का स्वागत करता है। धन्यवाद "एकलव्य" https://loktantrasanvad.blogspot.in/



टीपें : अब "लोकतंत्र" संवाद मंच प्रत्येक 'सोमवार, सप्ताहभर की श्रेष्ठ रचनाओं के साथ आप सभी के समक्ष उपस्थित होगा। रचनाओं के लिंक्स सप्ताहभर मुख्य पृष्ठ पर वाचन हेतु उपलब्ध रहेंगे।