शनिवार, 21 मई 2016

चन्द माहिया : क़िस्त 32




:1:
जब तुम ने नहीं माना
टूटे रिश्तों को
फिर क्या ढोते जाना

:2:
इस दिल ने पुकारा है
ख़ामोशी तेरी, 
मुझ को न गवारा है

:3:
तुम तोड़ गए सपने
ऐसा भी होगा
सोचा ही नहीं हमने

  :4:
क्या वो भी ज़माना था
आँख मिचौली में
तुम से छुप जाना था

5
हर रंग जो सच्चा है
प्रीत मिला दे तो
सब रंग से अच्छा है


-आनन्द पाठक-
[सं 13-06-18]


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