सोमवार, 3 सितंबर 2018

चन्द माहिया : क़िस्त 53

चन्द माहिया  :क़िस्त 53

:1:
 क़िस्मत की बातें हैं 
कुछ को ग़म ही ग़म
कुछ को  सौग़ातें  हैं

:2:
कब किसने माना है
आज नहीं तो कल
सब छोड़ के जाना है

:3:
कब तक भागूँ मन से
देख रहा कोई
छुप छुप कर चिलमन से

:4:
कब दुख ही दुख रहता
वक़्त किसी को भी
यकसा तो नहीं रखता

5
लगनी होती ,लगती
आग मुहब्बत की
ताउम्र नही बुझती


-आनन्द.पाठक-

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