शनिवार, 15 सितंबर 2018

चन्द माहिया : क़िस्त 56

चन्द माहिया  :क़िस्त 56

:1:
ये कैसी माया है
तन तो है अपना
मन तुझ में समाया है

:2:
जब दर पे तिरे आया
हर चेहरा मुझ को
मासूम नज़र आया

:3:
ये कैसा रिश्ता है
ओझल है लेकिन
दिल रमता रहता है

:4:
बेचैन बहुत है दिल
कब तक मैं तड़पूं
अब आजा ,आकर मिल

:5:
अन्दर की सब बातें 
लाख छुपाओ तुम
सब जह देती आँखें

-आनन्द.पाठक-

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