शुक्रवार, 2 जनवरी 2026

अभी संभावना है--एक समीक्षा --राम अवध विश्वकर्मा [ प्रकाशित -विश्व विधायक हिंदी समाचार पत्र--लखनऊ ] दिनांक 31-दिसम्बर-2025]



 मित्रो !

इसी मंच पर मेरे नवीनतम ग़ज़ल संग्रह ’ अभी संभावना है -" पर आ0 रामअवध विश्वकर्मा जी की समीक्षा 22 दिसम्बर 25 को आप ने पढ़ी थी और लोगो ने सराहा भी था।
वही समीक्षा राम अवध जी ने प्रकाशनार्थ एक हिंदी साप्ताहिक समाचार पत्र ’विश्व विधायक’ [ लखनऊ ] को भेज दिया था जो प्रकाशित भी हो गई।
इस पत्र का पी0डी0एफ़0 फ़ाइल इस मंच पर लगा रहा हूँ । यदि आप आवश्यक समझे तो उक्त समीक्षा यहाँ पढ़ सकते है। साथ ही इसका कुछ भाग आप के अवलोकनार्थ भी लगा रहा हूँ|
[प्रथम दॄष्टया -पत्र के उक्त भाग के editing में और अपेक्षित सुधार की आवश्यकता थी--आनन्द पाठक ’आनन’



अनुभूतियाँ 187/74

 अनुभूतियाँ 187/74

:745:
जो भी कर्म करोगे प्यारे !
कर्मों का फल यहीं भोगना ।
पिछले जन्मों का फल है 
सखे ! तुम्हारा व्यर्थ सोचना ।

:746:
छ्द्म आवरण ओढ़े ओढ़ कर
सभी दिखावे में व्याकुल हैं
जान रहे हैं वो भी ख़ुद को
मिथ्या भावों के संकुल हैं ।





गुरुवार, 1 जनवरी 2026

अनुभूतियाँ 186/73

 अनुभूतियाँ 186/73

:741:
अर्ज़ किया है मैने तुमसे
चाहे मानो या ना मानो
कौन है अपना, कौन पराया
कम से कम इतना पहचानो ।

742:
प्रेम हमेशा रद कर देता
मतलब,स्वार्थ,ग़रज़, प्रत्याशा
प्रेम सदा समझा करता है
प्रेम समर्पण वाली भाषा ।

743
शब्द जहाँ पर चुप हो जाते
पीड़ा को बतलाने में जब
आँखें सूनी सूनी रहती -
मौन मुखर हो जाता है तब।

744
कितने रूप ज़िंदगी तेरे
कितने मोड़ अभी राहों में
जीन है तो चलना होगा
कड़ी धूप में या छावों में ।

-आनन्द पाठक ’आनन’