फ़ऊलुन---फ़ऊलुन--फ़ऊलुन--फ़ऊलुन
122----------122------122--------122
बह्र-ए-मुतक़रिब मुसम्मन सालिम
---------------------------------------------
ग़ज़ल : 022 ओके
मुहब्बत की जादू-बयानी न होती ,
अगर तेरी मेरी कहानी न होती ।
न "राधा" से पहले कोई नाम आता ,
अगर कोई ’मीरा" दिवानी न होती ।
ये राज़-ए-मुहब्बत न होता नुमायां,
जो बहकी हमारी जवानी न होती ।
हमें दीन-ओ-ईमां से क्या लेना-देना ,
बला ये अगर आसमानी न होती ।
उमीदों से आगे उमीदें न होतीं ,
तो हर साँस में ज़िन्दगानी न होती ।
कोई बात तो उन के दिल पे लगी है ,
ख़ुदाया ! मेरी लन्तरानी न होती ।
रकीबों की बातों में आता न गर वो ,
तो ’आनन’ उसे बदगुमानी न होती ।
-आनन्द.पाठक
नुमायां = ज़ाहिर होना
लन्तरानी = झूटी शेखी /डींग मारना
[सं 20-05-18]
122----------122------122--------122
बह्र-ए-मुतक़रिब मुसम्मन सालिम
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ग़ज़ल : 022 ओके
मुहब्बत की जादू-बयानी न होती ,
अगर तेरी मेरी कहानी न होती ।
न "राधा" से पहले कोई नाम आता ,
अगर कोई ’मीरा" दिवानी न होती ।
ये राज़-ए-मुहब्बत न होता नुमायां,
जो बहकी हमारी जवानी न होती ।
हमें दीन-ओ-ईमां से क्या लेना-देना ,
बला ये अगर आसमानी न होती ।
उमीदों से आगे उमीदें न होतीं ,
तो हर साँस में ज़िन्दगानी न होती ।
कोई बात तो उन के दिल पे लगी है ,
ख़ुदाया ! मेरी लन्तरानी न होती ।
रकीबों की बातों में आता न गर वो ,
तो ’आनन’ उसे बदगुमानी न होती ।
-आनन्द.पाठक
नुमायां = ज़ाहिर होना
लन्तरानी = झूटी शेखी /डींग मारना
[सं 20-05-18]
5 टिप्पणियां:
न "राधा" से पहले कोई नाम आता
अगर कोई ’मीरा" दिवानी न होती
achhi lagi gajal mubarak ho
बेहतरीन गजल।
बहुत ही खूबसूरत लहजे की ग़ज़ल है... बेहतरीन!
उमीदों से आगे उमीदें न होती
तो हर साँस में ज़िन्दगानी न होती
kya shaandaar baat kahi hai ..
khoobsoorat gazal
उमीदों से आगे उमीदें न होती
तो हर साँस में ज़िन्दगानी न होती
kya shaandaar baat kahi hai ..vaah
khoob soorat gazal
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