गुरुवार, 10 मार्च 2016

चन्द माहिया: क़िस्त 30

चन्द माहिया : क़िस्त 30

:1:
तुम से गर  जुड़ना है
मतलब है इस का
बस ख़ुद से बिछुड़ना है

:2:
आने को तो आ जाऊँ
रोक रहा कोई
कैसे मैं ठुकराऊँ ?

:3:
इक लफ़्ज़ मुहब्बत है
जिसके लिए मेरी
दुनिया से अदावत है

:4;
दीदार हुआ जब से
जो भी रहा बाक़ी
ईमान गया तब से

:5:
जब तू ही मेरे दिल में
ढूँढ रहा है दिल
फिर किस को महफ़िल में ?

आनन्द.पाठक
[सं 13-06-18]


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