शुक्रवार, 1 जनवरी 2016

चन्द माहिया :क़िस्त 26


चन्द माहिया : क़िस्त 26
 
 :1:
इतना तो कर साथी
चुपके से आ जा
कर दिल में घर साथी


:2:

साँसो का बन्धन है
टूटेगा कैसे ?
रिश्ता जो पावन है

:3:

दिल और धड़कने दो
रुख पे जो पर्दा
कुछ और सरकने दो

:4:

अपनी येआदत है
हुस्न परस्ती में
दिल राह-ए-जियारत है

:5:

आती है सदा फिर भी
लाख ख़फ़ा हो कर 
करता वो वफ़ा फिर भी

-आनन्द.पाठक-

[सं 13-06-18]



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