शुक्रवार, 28 अप्रैल 2017

चन्द माहिए : क़िस्त 39

चन्द माहिए : क़िस्त 39 


:1:

वो ख़्वाब दिखाते हैं
जन्नत की हमको
जन्नत ही जलाते हैं

:2;

नफ़रत ,शोले ,फ़ित्ने
किस की जली बस्ती
रोटी सेंकी ,किसने ?

:3:

ये कैसी सियासत है ?
धुन्ध ,धुँआ केवल
ये किस की विरासत है?

;4:

रहबर बन कर आते
छोटे बच्चों से
पत्थर हैं चलवाते 

5
 ये इश्क़ इबादत है
 दैर-ओ-हरम दिल है
 और एक ज़ियारत है

-आनन्द.पाठक-

[सं 15-06-18]


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