मंगलवार, 31 जुलाई 2018

चन्द माहिया : क़िस्त 50

चन्द माहिया : क़िस्त 50

1

पल जो भी गुज़र जाता
छोड़ के कुछ यादें
फिर लौट के कब आता ?

2
होता भी अयाँ कैसे
दिल तो ज़ख़्मी है
कहती भी ज़ुबाँ कैसे ?

3
 तुम ने मुँह फेरा है
टूट गए सपने
दिन में ही अँधेरा है

4
शोलों को भड़काना
ये भी सज़ा कैसी
भड़का के चले जाना

5

कितने बदलाव जिए
सोच रहा हूँ मैं
कागज की नाव लिए

-आनन्द.पाठक-

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