अनुभूतियाँ 183/70
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जीवन है तो सुख दुख भी है
राग-रंग भी, मिलन-जुदाई
प्रथम साँस से अन्त साँस तक
जीवन की पटकथा समाई ।
730
धन दौलत ये झूठ दिखावा
एक छलावा सब माया है
छोड़ यहीं जाना है सबकुछ
कौन अमर होकर आया है।
731
्ज्योति जगे जब मन के अंदर
मन प्रकाश से भर जाता है
क्षमा ,दया,करुणा जग जाती
अहंकार तब मर जाता है ।
732
सत्य सदा कड़वा होता है
झूठ सदा मनमोहक होता
झूठ हमेशा रंग बदलता
सत्य ज्योति का द्योतक होता
-आनन्द.पाठक ’आनन’
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