चन्द माहिए : क़िस्त 111/21
:1:
उस पार मेरा माही
टेरेगा जिस दिन
उस दिन तो जाना ही ।
:2:
जब दिल ही नहीं माना
क्या होगा लिख कर
कोई राजीनामा ।
:3:
बच्चे तो गर उड़ कर
अब तो बस हम तुम
तनहाई , सूना घर ।
:4:
इतना एकाकीपन
डूब रहा है मन
तुम बिन मेरे साजन ।
तुम बिन मेरे साजन ।
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