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गुरुवार, 14 अगस्त 2025

चंद माहिए 110/20

 चन्द माहिए : क़िस्त 110/20

:1: 
उस पार मेरा माही
टेरेगा जिस दिन
उस दिन तो जाना ही ।

:2:
जब दिल ही नहीं माना
क्या होगा लिख कर
कोई राजीनामा ।

:3:
बच्चे तो गर उड़ कर
अब तो बस हम तुम
तनहाई , सूना घर ।

:4:
इतना एकाकीपन
डूब रहा है मन
तुम बिन मेरे साजन ।

गुरुवार, 17 जुलाई 2025

चंद माहिए 109/19 [सावन पर]

क़िस्त 109: -[सावन पर]

:1: 
बारिश लगती है भली
खेल रहे बच्चे
कागज की नाव चली

:2:
सबने है ये माना
पिंजरे से इक दिन
पंछी को उड़ जाना ।

:3:
क्यॊं आँखें हैं पुरनम
लेकर चलती हो
क्यों दुनिया भर का ग़म ।

:4:
सावन भी अब बीता
आई न जब तुम तो
मौसम फ़ीका फ़ीका ।

:5:
फिर घिर आए बादल
भीगेंगा जब तन
मन फिर होगा पागल ।

-आनन्द.पाठक-

चन्द माहिये: 109/19

चंद माहिए : क़िस्त 109/19 


:1:

बदरा बरसै रिमझिम

आग लगाता है

तन में मद्धिम मद्धिम ।


:2:

शैलाब है जब आता 

बादल जब फटता

मन अपना डर जाता ।


:3:

उड़ता तेरा आँचल

नील गगन में ज्यों

उड़ता रहता बादल ।


:4:

कुछ भी ना कहती हो

अन्दर ही अन्दर 

बस घुटती रहती हो ।


:5:

क्या तुम को सुनानी है

जैसे सबकी है

अपनी भी कहानी है ।


-आनन्द.पाठक-


शनिवार, 12 जुलाई 2025

चन्द माहिए 108/18 : सावन पर

 सावन आया --- चन्द माहिए सावन पे

क़िस्त:  108/18

:1:
शिव भक्तों के दम से 
गूँज रहीं राहें
जय भोले बम बम से ।
2
सावन में मन निर्मल
काँवड़िए निकले
ले ले कर पावन जल ।
:3:
सावन में पावन काम
काँवड़ ले जाना
भोले बाबा के धाम ।
:4:
जय जय बाबा भोले 
गूँज उठा मंदिर
 जब मिल कर सब बोले ।
:5:
लेकर अपना काँवर
आया हूँ  मैं भी
भोले बाबा के घर ।

-आनन्द.पाठक 'आनन’
880092 7181


इन्ही माहिए को आ0 विनोद कुमार उप[ध्याय जी [ लखनऊ ] के स्वर में 
यहाँ सुने-
https://www.facebook.com/share/v/1M5r81jkdh/




शुक्रवार, 11 जुलाई 2025

चन्द माहिए 107/17

 चन्द माहिए : 107 /17

:1:

प्रवचन तो अच्छा है
लेकिन मन भी क्या
उतना ही सच्चा है ?

:2:
क्यों  फेर रहा माला
साफ़ ज़रा कर लें
मन पर जो पड़ा जाला

:3:
मन साध नहीं ्पाया
चंदन टीका ही
केवल तुझको भाया

:4:
कंठी टीका माला
दंड कमंडल भी
मन फिर भी है काला

:5:
दुनिया को सिखाते हो
भगवाधारी बन
खुद कब अपनाते हो ?

-आनन्द पाठक-

सोमवार, 3 मार्च 2025

चन्द माहिए 106/16 [होली]

 चंद माहिए 106/16

1;

होली का है मौसम 

छा जाती मस्ती

जब साथ रहे हमदम ।


2:

कान्हा खेलें होली

भाग रही बच कर

राधा रानी भोली ।


3:

खुशियॊ से भरी झोली

मिल कर खेलेंगे

हम रंग भरी होली


;4:

कुछ रंग गुलाल लिए

राह तेरी देखूँ

फूलों का थाल लिए ।


5

जब होली आती है 

फूल बहक जाते

डाली मुस्काती हैं


-आनन्द.पाठक-





शुक्रवार, 2 अगस्त 2024

चन्द माहिए 105/15

 चन्द माहिए 105/15 [ उस पार]

:1:

कलियाँ हैं जन्नत की

ख़ूशबू आती है

माली के मिहनत की ।

:2:

कुदरत का करिश्मा है 

कौन समझ पाया

उसकी क्या सीमा है ।

:3;

दर्या यह गहरा है

डूबा जो इसमें

फिर कब वो उबरा है!


रविवार, 2 जून 2024

चन्द माहिए 104/14

 क़िस्त 104 /14 [माही उस पार]


1

जब तुम न नज़र आए

लाख हसीं चेहरे

मुझको न कभी भाए


2

नफ़रत को हराना है

तो सबके दिल में

उलफ़त को जगाना है


3

बस्ती तो जलाते हो

क्या हासिल होता

यह क्यों न बताते हो?


4

गुलशन में महक कैसी?

तुम तो नही गुज़री

डाली में लचक कैसी?

5

माना कि अँधेरा है

धीरज रख प्यारे

होने को सवेरा है


-आनन्द.पाठक-


चन्द माहिए 103/13

 क़िस्त 103/13 [माही उस पार]


1

देखा जो कभी होता

ग़ौर से जब मुझको

मैं खुद में नहीं होता ।


2

ऎ दिल ! क्यॊं दीवाना

कब उसको देखा

पढ़ कर ही जिसे जाना ।


3

जो तेरे अन्दर है

देख ज़रा, पगले !

क़तरे में समन्दर है ।


4

भगवा कंठी माला

व्यर्थ दिखावा क्यों

जब मन तेरा काला ।


5

ऐसा भी आना क्या

"जल्दी  जाना है"

हर बार बहाना क्या ।


रविवार, 17 मार्च 2024

चन्द माहिए 102 /12 होली पर

 चन्द माहिए 102/12 [होली पर] [माही उस पार]


;1: 

रंगो के दिन आए

कलियाँ शरमाईं
भौरें जब मुस्काए

:2:

आई होली आई

आज अवध में भी

खेलें चारो भाई

:3:

हर दिल पर छाई है

होली की मस्ती

गोरी घबराई है

:4:

"कान्हा मत छेड़ मुझे"

राधा बोल रही

"हट दूर परे, पगले !"


:5:

होली के बहाने से

बाज न आएगा

तू रंग लगाने से ।


-आनन्द पाठक-


चन्द माहिए : क़िस्त 101 /11 होली पर

 चन्द माहिए 101/11 : होली पर [माही उस पार]


:1:

होली में सनम मेरे 

थाम मुझे लेना

बहके जो कदम मेरे


:2:

घर घर में मने होली

हम भी खेलेंगे

आ मेरे हमजोली 

:3;

क्यों रंग लगाता है

दिल तो अपना है

क्यों दिल न मिलाता है?

:4:

क्यों प्रीत करे तन से

रंग लगा ऐसा

उतरे न कभी मन से ।

:5:

पूछे है अमराई

फागुन तो आया

गोरी क्यूँ नहीं आई ?


-आनन्द पाठक-



सोमवार, 19 फ़रवरी 2024

चन्द माहिए : क़िस्त100/10

  चन्द माहिए : क़िस्त  100/10 [माही उस पार]


:1:

क्या और सुनानी  है  

तेरी कहानी में 

मेरी भी कहानी है

:2:

जीवन का सफ़र बाक़ी

हाथ पकड़ चलना

मेरे जीवन साथी !

3

छुप कर भी गुजरेगी

कोई कली जब भी

खुशबू तो बिखरेगी

4

जुल्मों की कहानी है

जिंदा हो तो फिर

आवाज उठानी है

5

अल्हड़ सी जवानी पर

इतना मत इतरा

इस जिस्म ए फानी पर

-आनन्द पाठक-

शुक्रवार, 29 दिसंबर 2023

चन्द माहिए : क़िस्त 99/09 : 22 जनवरी 2024 प्राण प्रतिष्ठा पर

 चन्द माहिए 99/09] : प्राण प्रतिष्ठा पर [माही उस पार]


:1:

जन जन के दुलारे हैं

आज अवध में फिर 

प्रभु राम पधारे  हैं


:2:

झूमेंगे नाचेंगे

प्राण प्रतिष्ठा में

श्री राम विराजेंगे


:3:

सपना साकार हुआ

राम लला जी का

मंदिर तैयार हुआ


:4:

प्रभु राम की सब माया

उनकी किरपा से

अब यह शुभ दिन आया


:5:

गिन गिन कर काटे दिन

स्वर्ग से उतरेंगे

भगवान सभी इस दिन


:6:

मंदिर की इच्छा में

पाँच सदी तक थे

दो नैन प्रतीक्षा में ।


:7:

प्रभु प्रेम में हो विह्वल

शर्त मगर यह भी

मन भाव भी हो निश्छल


-आनन्द.पाठक-

सोमवार, 21 अगस्त 2023

चन्द माहिए : क़िस्त 98/08

 चन्द माहिए : क़िस्त 98/08 [माही उस पार]

1

रितु बासंती आई

और नशा भरती

गोरी की अँगड़ाई


2

आ मेरे हमजोली

साथ सजाते हैं

आँगन की रंगोली

3

भूली बिसरी यादें

सोने कब देतीं

करती रहतीं बातें


4

कुछ ख़्वाब तुम्हारे थे

और थे कुछ मेरे

सब कितने प्यारे थे


5

जीवन भर चलना है

वक़्त कहाँ रुकता

गिरना है सँभलना है


-आनन्द.पाठक-


मंगलवार, 28 फ़रवरी 2023

चन्द माहिए : क़िस्त 97/07-वी [होली 2023]

 क़िस्त 97/07 [होली 2023] [माही उस पार]

1

होली के दिन आए

आए न बालमवा

मौसम भी तड़पाए


2

रंगों का है मौसम

खेल रहे कान्हा

राधा भी कहाँ है कम


3

है प्रेम का रंग ऐसा

रंग अलग कोई

चढ़ता ही नहीं वैसा


4

होली का मज़ा क्या है

रंग लगा मन पे

इस तन में रखा क्या है


5

गोरी हँस कर बोली

" मन ही नहीं भींगा

फिर कैसी यह होली


-आनन्द.पाठक-

इन्ही माहियों को गाया है डा0 अर्चना पाण्डेय और उनकी बेटी रश्मि ने [ युगल गायन]






चन्द माहिए : क़िस्त 96/06

 क़िस्त 96/06 [माही उस पार]

1

तुम पास जो आओ तो

प्यास मेरी देखो

खुल कर जो पिलाओ तो


2

कब प्यास बुझी सब की

नदियाँ प्यासी हैं

प्यासा है समन्दर भी


3-

इक बार ही नाम लिया

नाम तेरा लेकर

जग ने बदनाम किया


4

मैं कैसे कह पाता

छू देती  गर तुम

तन और महक जाता


5

मौसम महका महका

रंग लगा देना

मन है बहका बहका


-आनन्द.पाठक-


सोमवार, 30 जनवरी 2023

चन्द माहिए : क़िस्त 95/05

 क़िस्त 95/05 [माही उस पार]

1

सपनों के शीश महल

टूट ही जाना है

सच, आज नहीं तो कल


2

चलने की तैय्यारी

आ मेरी माहिया

कुछ और निभा यारी


3

मेरी भी गली में आ

ओ मेरी माहिया !

 बस एक झलक दिखला


4

कांटों से भरी राहें

तेरे दर की हों 

फिर भी तुमको चाहें


5

आसान नहीं होतीं

प्रेम नगर वाली

गलियाँ सँकरी होतीं


चन्द माहिए : क़िस्त 94/04

 क़िस्त 94/04 [माही उस पार]


1

कुछ यादें रह जाती

सूनी आँखों में

आँसू बन कर आतीं


2

कोई मिल जाता है

राह-ए-मुहब्बत में 

फिर क्यों खो जाता है?


3

कलियाँ सहमी सहमी

माली की नज़रें

दिखतीं बहकी बहकी


4

कुछ अपनी सीमाएँ

मर्यादा की हैं

हम भूल नहीं जाएँ


5

मैं इक प्यासा राही

मिलना है मुझको

उस पार मेरा माही 


चन्द माहिए : क़िस्त 93/03

 


क़िस्त 93/ 03 [माही उस पार]


1

दुनिया की छोड़ो तुम

क्या करना इसका

दिल से दिल जोड़ो तुम


2

ख़्वाबों में मिला करना

लौट के आऊँगा

इक दीप जला रखना


3

अब क्या मजबूरी है

और सुना माहिया

तेरी बात अधूरी है


4

जानी पहचानी सी

लगती है तेरी

कुछ मेरी कहानी सी


5

बाग़ों के बहारों का

रंग चढ़ा मुझ पर

कलियों के नज़ारों का


चन्द माहिए : क़िस्त 92/02

 क़िस्त 92/ 02[माही उस पार]


1

अब और न कर बातें

झेल चुकी हूँ मैं

हर बार तेरी घातें ।


2

टुकड़ा टुकड़ा जीवन

जोड़ के जीते हैं

जीने का है बन्धन


3

गो, सुनने में तीखे

पैसों के आगे

सब रिश्ते हैं फीके


4

आदाब मुहब्बत के

कुछ तो निभाते तुम

अन्दाज़ नज़ाक़त के


5

कैसी थी मुलाकातें

कुछ तो बता, गुइयाँ !

क्या क्या थी हुई बातें