मुक्तक 22
;1;
मजदूरों की बस्ती साहिब
जान यहाँ है सस्ती साहिब
जब चाहे आकर उजाड़ दें
’बुधना’ की गृहस्थी साहिब।
:2:[26 जनवरी]
यह अपना भारत है महान
झंडे की अपनी आन-बान
शुचिता बस इसकी बनी रहे
शुचिता बस इसकी बनी रहे
पावन है अपना संविधान ।
गणतन्त्र दिवस.गणतन्त्र दिवस।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें