शनिवार, 25 मई 2019

चन्द माहिया : क़िस्त 58


चन्द माहिया : क़िस्त 58

:1:
सदचाक हुआ दामन
तेरी उलफ़त में
बरबाद हुआ ’आनन’

:2:
क्यों रूठी है ,हमदम
कैसे मनाना है
कुछ मुझ को  सिखा जानम

:3:
दिल ले ही लिया तुमने
जाँ भी ले लेते
क्यों छोड़ दिया तुमने ?

:4:
लहरा के न चल पगली
रह रह कर दिल पर
गिर जाती है बिजली


:5:
क्या पाना क्या खोना
जब से गए हो तुम
दिल का खाली कोना

-आनन्द.पाठक--

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