शुक्रवार, 28 जून 2019

चन्द माहिया : क़िस्त 61


चन्द माहिया : क़िस्त 61

:1:
गुलशन की हवाओं में
ज़ह्र भरा किसने
हर बार चुनावों में ?

:2:
दर्या ,परबत,झरना
चाँद सितारे सब
ये किसकी है रचना

:3:
कलियाँ सकुची सहमी
चश्म-ए-बद किसकी
आकर इन पर ठहरी

:4:
जितनी है तपिश बाहर
प्रेम अगन मन की
उतनी ही तपिश अन्दर

;5:
दिल मेरा फ़क़ीराना
छोड़ तेरा अब दर
जाना तो किधर जाना

-आनन्द.पाठक-

कोई टिप्पणी नहीं: