शुक्रवार, 18 दिसंबर 2020

चन्द माहिए : क़िस्त 87

 


क़िस्त 87


1

यूँ रूठ के चल देना

हौले से हँस कर

फिर बात बदल  देना


2

अबतक क्या कम भोगा ?

उल्फ़त में तेरे

जो होना है होगा


3

ख़ामोश ही क्यों रहती

पहलू में आ कर

कुछ तुम भी तो कहती 


4

ये राज़ न खोलेगा

पूछ रही हो क्या

दरपन क्या बोलेगा


5

लहरा कर चलती हो

खुद से ही छुप कर 

जब छत पे टहलती हो

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-आनन्द.पाठक-